अध्याय 76

लैला ने मुट्ठियाँ कसकर भींच लीं। नौकरों के गिड़गिड़ाते चेहरों को देखते हुए उसका चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। उसकी टाँगें जैसे उसकी मजबूरी के बोझ से भारी हो गई थीं।

वह हमेशा रिश्तों को दिल से निभाने वाली इंसान रही थी—इसीलिए वह एक ही आदमी के पीछे दस साल तक तड़पती रही।

शादी के इन तीन सालों में मीरा हर...

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